Daily Readings

Mass Readings for
29 - Nov- 2025
Saturday, November 29, 2025
Liturgical Year C, Cycle I
Saturday of the Thirty‑fourth week in Ordinary Time

दैनिक पाठ:
पहला पाठ: दानिएल का ग्रन्थ 7:15-27
स्तोत्र: दानिएल का ग्रन्थ 3:82, 83, 84, 85, 86, 87
सुसमाचार : सन्त लूकस 21:34-36

माता मरियम की माला विनती: आनन्द के पाँच भेद


वर्ष का चौंतीसवाँ सप्ताह, शनिवार - वर्ष 1

पहला पाठ: दानिएल का ग्रन्थ 7:15-27
भंजन: दानिएल का ग्रन्थ 3:82, 83, 84, 85, 86, 87
सुसमाचार: सन्त लूकस 21:34-36

First Reading
दानिएल का ग्रन्थ 7:15-27
"अधिकार और प्रभुत्व सर्वोच्च प्रभु के सन्तों की प्रजा को दिया जायेगा।”

मैं बहुत व्याकुल हो उठा और अपने मन के दृश्यों के कारण विस्मित हो गया। मैंने वहाँ उपस्थित लोगों में से एक के पास जा कर पूछा कि इन सब बातों का अर्थ क्या है और उसने मुझे समझाते हुए कहा, "ये चार विशालकाय पशु चार राज्य हैं, जो पृथ्वी पर प्रकट होंगे, किन्तु सर्वोच्च प्रभु के सन्तों को जो राजत्व दिया जायेगा, वह अनन्तकाल तक बना रहेगा।” तब मैंने जानना चाहा कि उस चौथे पशु का अर्थ क्या है, जो सभी पहले पशुओं से भिन्न था, जो बहुत डरावना था, जो चबाता और खाता जाता था और जो कुछ रह जाता, उसे पैरों तले रौंदता था। मैंने उसके सिर के दस सींगों के विषय में जानना चाहा और उस अन्य सींग के विषय में भी, जिसके निकलने पर तीन सींग उखड़ गये उस सींग के विषय में जिसकी आँखें थी, जिसका एक डींग मारने वाला मुँह था और जो दूसरे सींगों से अधिक बड़ा दिखता था। मैं देख ही रहा था कि वह सींग सन्तों से युद्ध कर रहा था और वयोवृद्ध व्यक्ति के आने तक उन पर प्रबल हो रहा था। उसने सर्वोच्च प्रभु के सन्तों को न्याय दिलाया और वह समय आया जब सन्तों ने राज्य पर अधिकार प्राप्त कर लिया। उसने मुझे यह उत्तर दिया "चौथा पशु पृथ्वी पर प्रकट होने वाला चौथा राज्य है। वह अन्य सब राज्यों से भिन्न होगा। वह समस्त पृथ्वी को खा जायेगा और पैरों तले रौंद कर चूर-चूर कर देगा। वे दस सींग इस राज्य के दस राजा हैं। उनके बाद एक ऐसे राजा का उदय होगा, जो पहले के राजाओं से भिन्न होगा और तीन राजाओं को परास्त कर देगा। वह सर्वोच्च प्रभु के विरुद्ध बोलेगा, सर्वोच्च प्रभु के सन्तों पर अत्याचार करेगा और पर्वों और प्रथाओं में परिवर्तन लाने की योजना तैयार करेगा। सन्त साढ़े तीन वर्ष तक उसके हाथ में दिये जायेंगे। इसके बाद न्याय की कार्यवाही प्रारंभ होगी। राजत्व उस से छीन लिया जायेगा और सदा के लिए उसका सर्वनाश किया जायेगा। तब पृथ्वी भर के सब राज्यों का अधिकार, प्रभुत्व और वैभव सर्वोच्च प्रभु के सन्तों की प्रजा को प्रदान किया जायेगा। उसका राज्य सदा बना रहेगा और सभी राष्ट्र उसकी सेवा करेंगे और उसके अधीन रहेंगे।”

प्रभु की वाणी।

Responsorial Psalm
दानिएल का ग्रन्थ 3:82, 83, 84, 85, 86, 87
अनुवाक्य : उसकी महिमा गाओ और निरन्तर उसकी स्तुति करो।

मानव जाति प्रभु को धन्य कहे।
अनुवाक्य : उसकी महिमा गाओ और निरन्तर उसकी स्तुति करो।

इस्राएल प्रभु को धन्य कहे।
अनुवाक्य : उसकी महिमा गाओ और निरन्तर उसकी स्तुति करो।

प्रभु के याजक प्रभु को धन्य कहें।
अनुवाक्य : उसकी महिमा गाओ और निरन्तर उसकी स्तुति करो।

प्रभु के सेवक प्रभु को धन्य कहें।
अनुवाक्य : उसकी महिमा गाओ और निरन्तर उसकी स्तुति करो।

धर्मियों की आत्माएँ प्रभु को धन्य कहें।
अनुवाक्य : उसकी महिमा गाओ और निरन्तर उसकी स्तुति करो।

भक्त जन और दीन-हृदय प्रभु को धन्य कहें।
अनुवाक्य : उसकी महिमा गाओ और निरन्तर उसकी स्तुति करो।

Gospel
सन्त लूकस 21:34-36
जागते रहो, जिससे तुम इन सब आने वाले संकटों से बचने योग्य बन जाओ।”

येसु ने अपने शिष्यों से कहा, "सावधान रहो। कहीं ऐसा न हो कि भोग-विलास, नशे और इस संसार की चिन्ताओं से तुम्हारा मन कुण्ठित हो जाये और वह दिन फन्दे की तरह अचानक तुम पर आ गिरे; क्योंकि वह दिन समस्त पृथ्वी के सभी निवासियों पर आ पड़ेगा। इसलिए जागते रहो और सब समय प्रार्थना करते रहो, जिससे तुम इन सब आने वाले संकटों से बचने और भरोसे के साथ मानव पुत्र के सामने खड़ा होने योग्य बन जाओ।"

प्रभु का सुसमाचार।